उत्तराखंड बिच्छू घास || Urtica dioica Uttarakhand

/उत्तराखंड सरकार ने बिच्छू घास (हिमालयन नेटल / Urtica dioica) को केंद्र सरकार के टेक्निकल टेक्सटाइल मिशन से जोड़ने का प्रस्ताव रखा है। इस पहल का उद्देश्य राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और किसानों व कारीगरों के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा करना है।
बिच्छू घास, जिसे स्थानीय भाषा में कंडाली या सिसौंण भी कहा जाता है, अब तक एक जंगली पौधे के रूप में जानी जाती थी। लेकिन इससे प्राप्त प्राकृतिक रेशों (फाइबर) को प्रोसेस करके पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ वस्त्र (Eco-friendly Textiles) बनाए जा सकते हैं।
यह पहल उत्तराखंड को पर्यावरण-अनुकूल कपड़ों की बढ़ती वैश्विक मांग में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए उत्तराखंड ने टेक्निकल टेक्सटाइल मिशन के तहत बिच्छू घास आधारित वस्त्रों का प्रस्ताव रखा
राज्य सरकार ने पर्यावरण-अनुकूल हिमालयन नेटल (बिच्छू घास) के रेशों को टेक्निकल टेक्सटाइल मिशन के अंतर्गत शामिल करने के लिए केंद्र सरकार से मंज़ूरी मांगी है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना और किसानों व कारीगरों के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा करना है।
सरकार ने इस पहल के तहत बिच्छू घास आधारित वस्त्र निर्माण, मिनी टेक्सटाइल पार्क की स्थापना, निफ्ट (NIFT) के विस्तार, तथा स्थानीय कारीगरों और किसानों को प्रशिक्षण व
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रोज़गार उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा है।

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